मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

कविता : घटना क्षितिज

समय
हम दोनों को बहा ले गया है
एक दूसरे के घटना क्षितिज (event horizon) के पार

अब हमारे साथ घटने वाली घटनाएँ
एक दूसरे को प्रभावित नहीं कर सकतीं

यह जानने का अब हमारे तुम्हारे पास कोई जरिया नहीं बचा
कि कैसी हो मेरे बिना तुम
और तुम्हारे बिना मैं

अब अगर हम महसूस कर सकें
एक दूसरे का दर्द
बिना सूचनाओं के आदान प्रदान के
तब समझना
कि जो संबंध हममें और तुममें था
वह कोई आकर्षण बल नहीं
बल्कि एक क्वांटम जुड़ाव (quantum entanglement) था
जो जुड़ गया था
ब्रह्मांड में हमारी उत्पत्ति के साथ ही
और जिसे समय भी खत्म नहीं कर सकता

यदि ऐसा हुआ
तब समझना
कि हमें फिर मिलने से कोई नहीं रोक सकता
हमारा मिलना
केवल समय की बात है
और समय बीतने के साथ ही
बढ़ती जा रही है
हमारे मिलन की संभावना

6 टिप्‍पणियां:

  1. सींचा आँसू -लहू से, संग में जो उद्यान |
    हम हैं असली बागवाँ, जल्द मिलेंगे आन ||

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  2. गूढ अर्थ वाले तकनीकी शब्दों का कविता में सुंदर और सहज विवेचन करने में पारंगत हैं आप। बधाई।

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  3. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  4. आपसी रिश्तों के ताने बाने में बंधी शशक्त रचना ... सोच को नयी दिशा डी है ...

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  5. संबंधों की सार्थकता परिभाषित करती सुन्दर रचना!

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जो मन में आ रहा है कह डालिए।