गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

कविता : नाभिकीय विखंडन एवं संलयन

लगभग एक साथ खोजे गए
नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन

मगर हमने सबसे पहले सीखा
विखंडन की ऊर्जा का इस्तेमाल

किंतु बचे रहने और इंसान बने रहने के लिए
हमें जल्दी ही सीखना होगा
संलयन की ऊर्जा का सही इस्तेमाल

3 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार ||

    शुभकामनाये ||

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  2. बहुत खूब, एक प्यारी विज्ञान कविता. परन्तु मेरे भाई विखंडन के लिए चाहिए थी थोड़ी ऊर्जा और संलय के चाहिए होगी अत्यधिक ऊर्जा. आज जब हमारे पास इतनी ऊर्जा नहीं बची जो दांपत्य और संयुक्त परिवार को जोड़ कर बड़ा नाभिक बना सके तो संलयन की यह आशा ...कठिन है. लेकिन ख़ुशी हुई यह जानकर की संलयन का महत्वा लोगो मथने लगा है.

    मै एक चीज और बताऊँ हमारी संस्कृति में देवी दुर्गा की जो अवधारणा है वह संलयन ही है. छोटे-छोटे देव नाभिकों का संलयन. समाज से कुरीतियों, भ्रष्टाचार और दुराचार से लड़ने का इससे अच्छा कोई दूसरा उपाय नहीं. समाज दर्शन इसी सिद्धांत को 'संघे शक्ति कलियुगे' कहता है. बधाई ढेर सारी बधाई इस रचनात्मक सोच और सैद्धांतिक वैज्ञानिक के लिए.

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