शुक्रवार, 23 मई 2014

ग़ज़ल : पेड़ ऊँचा है, न इसकी छाँव ढूँढो

कामयाबी चाहिए तो पाँव ढूँढो
पेड़ ऊँचा है, न इसकी छाँव ढूँढो

शहर से जो माँग लोगे वो मिलेगा
शर्त इतनी है यहाँ मत गाँव ढूँढो

जीत लोगे युद्ध सब, इतना करो तुम
जो न हो नियमों में ऐसा दाँव ढूँढो

दौड़ते रहना, यहाँ जिन्दा रहोगे
भीड़ में मत बैठने को ठाँव ढूँढो

नभ मिलेगा, गर करो हल्का स्वयं को
और उड़ने के लिए पछियाँव ढूढो

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना शनिवार 24 मई 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. बहुत ही खूबसूरत शेरों से सजी ग़ज़ल ... हर शेर पे दाद निकलती है ...

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    1. तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ दिगंबर जी।

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जो मन में आ रहा है कह डालिए।