सोमवार, 4 जुलाई 2011

कविता : मुक्त इलेक्ट्रॉन

ज्यादातर पदार्थों के
ज्यादातर इलेक्ट्रान
पहले से ही नियत कक्षाओं में
नाभिक के इर्द गिर्द
घूमते घूमते
अपनी सारी जिंदगी बिता देते हैं

पर कुछ पदार्थों के
कुछ इलेक्ट्रान ऐसे भी होते हैं
जो नाभिक के आकर्षण से हारकर
लकीर का फकीर बनने के बजाय
खोज करते हैं नए रास्तों की
पसंद करते हैं संघर्ष करना
धारा के विरुद्ध बहना
इन्हें कहा जाता है ‘मुक्त इलेक्ट्रॉन’

ऐसे ही इलेक्ट्रान पैदा कर पाते हैं विद्युत ऊर्जा
जो अंधकार को करती है रौशन
जिससे फलती फूलती हैं
नई सभ्यताएँ
और प्रगति करती है मानवता

3 टिप्‍पणियां:

  1. bhut rochak aur saral shabdo me vo samjha diya apne.. jo bhut muskil lagta tha kabhi... very nice....

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  2. ज्यादातर इलेक्ट्रान
    पहले से ही नियत कक्षाओं में
    नाभिक के इर्द गिर्द
    घूमते घूमते
    अपनी सारी जिंदगी बिता देते हैं
    talwar ki dhar ki tarah paini sonch bhi ji bahut khoob.

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  3. फिर तो आप को अब इसी नाम से पुकारना पड़ेगा

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