रविवार, 4 नवंबर 2012

हास्य रस के दोहे


जहाँ न सोचा था कभी, वहीं दिया दिल खोय
ज्यों मंदिर के द्वार से, जूता चोरी होय

सिक्के यूँ मत फेंकिए, प्रभु पर हे जजमान
सौ का नोट चढ़ाइए, तब होगा कल्यान

फल, गुड़, मेवा, दूध, घी, गए गटक भगवान
फौरन पत्थर हो गए, माँगा जब वरदान

ताजी रोटी सी लगी, हलवाहे को नार
मक्खन जैसी छोकरी, बोला राजकुमार

संविधान शिव सा हुआ, दे देकर वरदान
राह मोहिनी की तकें, हम किस्से सच मान

जो समाज को श्राप है, गोरी को वरदान
ज्यादा अंग गरीब हैं, थोड़े से धनवान

बेटा बोला बाप से, फर्ज करो निज पूर्ण
सब धन मेरे नाम कर, खाओ कायम चूर्ण

ठंढा बिल्कुल व्यर्थ है, जैसे ठंढा सूप
जुबाँ जले उबला पिए, ऐसा तेरा रूप 

45 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. हाथी जैसा देह है,गेंड़े जैसी चाल।
      तरबूजे सी खोपड़ी,खरबूजे सा गाल।

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  2. हमें सोरठे मोहते, बढ़िया भाव बहाव ।

    सकारात्मक डालते, रविकर हृदय प्रभाव ।।

    आप के दोहे सोरठे के रूप में पढ़ गया अपने डैश बोर्ड पर-

    देखिये तो क्या अनर्थ हो गया-

    हलवाहे को नार, मक्खन जैसी छोकरी |
    बोला राजकुमार, संविधान शिव सा हुआ||1||

    दे देकर वरदान, राह मोहिनी की तकें |
    हम किस्से सच मान, जो समाज को श्राप है ||

    गोरी को वरदान, ज्यादा अंग गरीब हैं,
    थोड़े से धनवान, बेटा बोला बाप से ||

    फर्ज करो निज पूर्ण, सब धन मेरे नाम कर,
    खाओ कायम चूर्ण, ठंढा बिल्कुल व्यर्थ है ||

    प्रभु पर हे जजमान, सौ का नोट चढ़ाइए |
    तब होगा कल्यान, फल, गुड़, मेवा, दूध, घी ||

    वहीं दिया दिल खोय, ज्यों मंदिर के द्वार से,
    जूता चोरी होय, सिक्के यूँ मत फेंकिए ||

    गए गटक भगवान फौरन पत्थर हो गए,
    माँगा जब वरदान, ताजी रोटी सी लगी ||

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक कुछ कहना है पर है ।।

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 6/11/12 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है ।

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  5. बहुत उम्दा लगे आपके हास्य दोहे,,,,,,,,
    धर्मेन्द्र जी,,,,आपका फालोवर बन गया हूँ आप भी फालोवर बने तो मुझे हार्दिक
    खुशी होगी,,,,,

    RECENT POST:..........सागर

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  6. दोहे हंसी के रंग मेंछलक छलक जाये
    धर्मेंद्र जी और पाठक पुलक पुलक जायें ।

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  7. अत्यंत हास्यपूर्ण रचना,,,:)

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  8. Dukh Mora Sathi o sakhi ,manuva peer pravah,ghadi vipati dekh k Sathi choote jay

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  9. Sukh k Sathi Prem k dukh me lqparvah,hriday mile n man mile usse kese nibah

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  10. Sukh k Sathi Prem k dukh me lqparvah,hriday mile n man mile usse kese nibah

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  11. Dukh Mora Sathi o sakhi ,manuva peer pravah,ghadi vipati dekh k Sathi choote jay

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  12. सर कविता के द्वारा आपने जो व्यंग की है, वो आज के परिवेश में बिलकुल सटीक बेठता है

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  13. आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा,आपकी रचना बहुत अच्छी।

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जो मन में आ रहा है कह डालिए।