सोमवार, 12 नवंबर 2012

दीपावली पर ग़ज़ल : रौशनी की महक बहे हर सू


फूल हैं आग के खिले हर सू
रौशनी की महक बहे हर सू

यूँ बिछे आज आइने हर सू
आसमाँ सी जमीं दिखे हर सू

लौट कर मायके से वो आईं
दीप ख़ुशियों के जल उठे हर सू

वो दबे पाँव आज आया है
एक आहट सी दिल सुने हर सू

दूसरों के तले उजाला कर
ये अँधेरा भी अब मिटे हर सू

नाम दीपक का हो रहा ‘सज्जन’
तन मगर तेल का जले हर सू

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