मंगलवार, 1 जनवरी 2013

ग़ज़ल : नया बरस कभी न इस बरस समान हो


नया रदीफ़ काफ़िया नया बयान हो
नए बरस नई जमीन से उड़ान हो

नए हों वेद, श्लोक नव, नया कुरान हो
नए बरस नवीन आरती अजान हो

पहाड़ सा उठें अगर कभी उठान हो
नए बरस न दूध सा कोई उफान हो

अतीत का न सिर्फ़ अब यहाँ बखान हो
नया समय खड़ा है मोड़ पर गुमान हो

न लाश ले के लौटता कोई विमान हो
नए बरस न जागता कोई मसान हो

नई अदालतें बनें नया विधान हो
नया बरस कभी न इस बरस समान हो

चले जो सत्य पर उसे न अब थकान हो
नए बरस न दब रही कोई जुबान हो

न पंछियों की ताक में यहाँ नए बरस
बहेलियों का जाल या कोई मचान हो

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उम्दा.बेहतरीन श्रृजन,,,,
    नए साल 2013 की हार्दिक शुभकामनाएँ|
    ==========================
    recent post - किस्मत हिन्दुस्तान की,

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  2. मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।
    आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े आत्म-विश्वास ।

    बढ़े आत्म-विश्वास, रास सन तेरह आये ।
    शुभ शुभ हो हर घड़ी, जिन्दगी नित मुस्काये ।

    रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो ।
    सुख-शान्ति सौहार्द, मंगलमय नव वर्ष हो ।।

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