शुक्रवार, 3 जून 2011

कविता: इंद्रियाँ और दिमाग़

इंद्रियाँ तो कठपुतलियाँ हैं
सबसे ऊपर बैठे दिमाग़ की
उसी के इशारों पर नाचती हैं
इंद्रियों को तो पता भी नहीं होता
कि वो आखिर कर क्या रही हैं
आवश्यकता से अधिक सुख सुविधाएँ
जिन्हें वो गलत तरीके से इकट्ठा कर रही हैं
उन्हें या तो निकम्मा बना देंगी
या रोगी
और अगर पकड़ी गईं
तो सारी सजा मिलेगी इंद्रियों को
बलि की बकरियाँ हैं इंद्रियाँ।

इंद्रियाँ करें भी तो क्या करें
आदिकाल से
नियम ही ऐसे बनते आये हैं
जिससे सारी सजा इंद्रियों को ही मिले,
हर देवता, हर महात्मा ने
हमेशा यही कहा है
कि इंद्रियों पर नियंत्रण रखो
दिमाग़ की तरफ़ तो
कभी भूल कर भी उँगली नहीं उठाई गई
कैसे उठाई जाती
उँगली भी तो आखिरकार
दिमाग़ के नियंत्रण में थी।

मगर कलियुग आने का
पुराने नियमों से विश्वास उठने का
एक फायदा तो हुआ है
अब यदा कदा कोई कोई उँगली
दिमाग़ की तरफ भी उठने लगी है,
ज्यादातर तो तोड़ दी जाती हैं
या जहर फैल जाएगा कहकर काट दी जाती हैं
मगर क्या करे दिमाग़
अनिश्चितता का सिद्धांत तो वो भी नहीं बदल सकता
कि उठने वाली हर उँगली तोड़ी नहीं जा सकती,
कोई न कोई उँगली बची रह ही जाएगी
तथा उस उँगली की सफलता को देखकर
उसके साथ और भी उँगलियाँ उठ खड़ी होंगी,
अन्ततः दिमाग को
उँगलियों की सम्मिलित शक्ति के सामने
सर झुकाना ही पड़ेगा
अपनी असीमित शक्ति का दुरुपयोग
रोकना ही पड़ेगा।

6 टिप्‍पणियां:

  1. आदिकाल से
    नियम ही ऐसे बनते आये हैं
    जिससे सारी सजा इंद्रियों को ही मिले,
    हर देवता, हर महात्मा ने
    हमेशा यही कहा है
    कि इंद्रियों पर नियंत्रण रखो
    दिमाग़ की तरफ़ तो
    कभी भूल कर भी उँगली नहीं उठाई गई
    कैसे उठाई जाती
    उँगली भी तो आखिरकार
    दिमाग़ के नियंत्रण में थी।
    waah , kitni sahi baat ubharker aai hai

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रियवर धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    आपकी प्रस्तुत रचना में इन्द्रियों पर दिमाग़ के वर्चस्व की अच्छी अभिव्यक्ति है -

    अन्ततः दिमाग को
    उँगलियों की सम्मिलित शक्ति के सामने
    सर झुकाना ही पड़ेगा
    अपनी असीमित शक्ति का दुरुपयोग
    रोकना ही पड़ेगा।

    …और उम्मीद भी ज़िंदा रखी है … :)

    बौद्धिक कविता के लिए आभार !

    साथ ही
    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  4. कृपया ,
    शस्वरं
    पर आप सब अवश्य visit करें … और मेरे ब्लॉग के लिए दुआ भी … :)

    शस्वरं कल दोपहर बाद से गायब था …
    हालांकि आज सवेरे से पुनः नज़र आने लगा है …
    लेकिन आज भी बार-बार मेरा ब्लॉग गायब हो'कर उसके स्थान पर कोई अन्य ब्लॉग रिडायरेक्ट हो'कर खुलने लग जाता है …

    कोई इस समस्या का उपाय बता सकें तो आभारी रहूंगा ।

    उत्तर देंहटाएं

जो मन में आ रहा है कह डालिए।