बुधवार, 20 अगस्त 2014

अनुवाद : टोमास ट्रांसट्रोमर की कविता ‘हरे टीले की बुलबुल’

हरी आधी रात को उत्तर दिशा में जहाँ तक बुलबुल की आवाज़ जाती है भारी पत्ते मदहोशी में झूमते हैं, बहरी कारें नियान-लाइन की ओर दौड़ती हैं। बुलबुल की आवाज़ बिना काँपे गूँजती है। यह मुर्गे की बाँग जितनी मर्दभेदी है फिर भी खूबसूरत और घमंड से मुक्त है। जब मैं जेल में था ये मुझे देखने आई। तब मैंने ध्यान नहीं दिया था लेकिन अब दे रहा हूँ। समय सूर्य और चन्द्रमा से नीचे बह बहकर सभी टिक टिक करती धड़ियों को धन्यवाद देता है। लेकिन यहाँ आकर समय का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। केवल बुलबुल की आवाज़ है जिसके कच्चे स्वरों की झनकार रात में आसमान के चमकते हँसिये पर धार लगा रही है।
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मूल कविता निम्नवत है।

Näktergalen i Badelunda

I den gröna midnatten vid näktergalens nordgräns. Tunga löv hänger i trance, de döva bilarna rusar mot neonlinjen. Näktergalens röst stiger inte åt sidan, den är lika genomträngande som en tupps galande, men skön och utan fåfänga. Jag var i fängelse och den besökte mig. Jag var sjuk och den besökte mig. Jag märkte den inte då, men nu. Tiden strömmar ned från solen och månen och in i alla tick tack tick tacksamma klockor. Men just här finns ingen tid. Bara näktergalens röst, de råa klingande tonerna som slipar natthimlens ljusa lie.

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत रमणीय कविता. तोमस ट्रांसट्रोमर की कोई पुस्तक हिंदी में अनुवादित हुई है क्या ?

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    1. नहीं जहाँ तक मैं जानता हूँ उनकी किसी पुस्तक का अभी तक हिन्दी में अनुवाद नहीं हुआ है।

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