सोमवार, 15 दिसंबर 2014

ग़ज़ल : सूखी यादें जब झड़ती हैं

सूखी यादें जब झड़ती हैं
जाकर आँखों में गड़ती हैं

अच्छा है थोड़ा खट्टापन
खट्टी चीजें कम सड़ती हैं

फ्रिज में जिनको हम रख देते
बातें वो और बिगड़ती हैं

हैं जाल सरीखी सब यादें
तड़पो तो और जकड़ती हैं

जब प्यार जताना हो ‘सज्जन’
नज़रें आपस में लड़ती हैं

6 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा है थोड़ा खट्टापन
    खट्टी चीजें कम सड़ती हैं ..
    बहुत ही लाजवाब ... कमाल का शेर है इस बेहतरीन ग़ज़ल का सज्जन जी ... दिली दाद कबूल करें ...

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