शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

ग़ज़ल : हम इतने चालाक न थे

बह्र : २२ २२ २२ २
         
जीवन में कुछ बन पाते
हम इतने चालाक न थे

सच तो इक सा रहता है
मैं बोलूँ या तू बोले

हारेंगे मज़लूम सदा
ये जीते या वो जीते

पेट भरा था हम सबका
भूख समझ पाते कैसे

देख तुझे जीता हूँ मैं
मर जाता हूँ देख तुझे

8 टिप्‍पणियां:

  1. Nice Article sir, Keep Going on... I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us.. Happy Independence Day 2015, Latest Government Jobs. Top 10 Website

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  2. क्या बात है सर ... अच्छा प्रयोग ...

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  3. Very nice article gives me lots of positive energy & a lesson to be positve. Great Efforts, God bless you…Keep it up!!!!

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जो मन में आ रहा है कह डालिए।