रविवार, 16 जून 2019

कविता : रक्षा करो

मैंने कहा जानवरों की रक्षा करो
उन्होंने मुझे महात्मा बता दिया
अनेकानेक पुरस्कारों से मुझे लाद दिया

मैंने कहा पूँजीपतियों से जानवरों की रक्षा करो
मेरी बात किसी ने नहीं सुनी
कुछ ने तो मुझे पागल तक कह दिया

मैंने कहा इंसानों की रक्षा करो
उन्होंने कहा तुम हरामखोरी का समर्थन करते हो
इंसान अपनी रक्षा स्वयं कर सकता है
अपना पेट स्वयं भर सकता है

मैंने कहा बच्चों की रक्षा करो
उन्होंने कहा बच्चों की रक्षा तो स्वयं भगवान करते हैं
हम भगवान से बड़े थोड़े हैं

मैंने कहा समलैंगिकों की रक्षा करो
उन्होंने मुझे समलैंगिक कह कर भगा दिया

मैंने कहा स्त्रियों की रक्षा करो
उन्होंने मुझे स्त्रैण कहकर दुत्कार दिया

मैंने कहा किसानों की रक्षा करो
उन्होंने कहा ज्यादा मत बोलो वरना टाँग तोड़ देंगे

मैंने कहा किसानों की पूँजीपतियों से रक्षा करो
उन्होंने डंडा लेकर मुझे खदेड़ लिया

मैंने कहा दलितों की रक्षा करो
उन्होंने कहा तुम अम्बेडकरवादी हो
वामपंथी हो, नास्तिक हो, अधर्मी हो

मैंने कहा आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन की रक्षा करो
उन्होंने कहा तुम नक्सली हो
तुम्हें तो गोली मार देनी चाहिये

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