शनिवार, 3 सितंबर 2022

ग़ज़ल: कब तक झुट्टे को पूजोगे

22 22 22 22 22 22

जब तक पैसे को पूजोगे
चोर लुटेरे को पूजोगे

जल्दी सोकर सुबह उठोगे
तभी सवेरे को पूजोगे

खोलो अपनी आँखें वरना
सदा अँधेरे को पूजोगे

नहीं पढ़ोगे वीर भगत को
तुम बस पुतले को पूजोगे

ईश्वर जाने कब से मृत है
कब तक मुर्दे को पूजोगे

अब तो जान चुके हो सच तुम
कब तक झुट्टे को पूजोगे

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