शनिवार, 30 मई 2026

ग़ज़ल : रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए

बह्र: 22 22 22 22 22 2

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए
जंगल का कानून है पहला, चुप रहिए

मँहगाई से पागल जनता, चुप रहिए
पूँजीपति को सारी सुविधा, चुप रहिए

प्रश्न किया तो कह देंगे गद्दार सभी
अवतारी है अपना राजा, चुप रहिए

राजसभा में न्याय खड़ा है घुटनों पर
कर दीजै फूलों की वर्षा, चुप रहिए

सच को फाँसी पर लटकाया राजा ने,
झूठ न बोला जाय तो भैया, चुप रहिए

एलमुनियम गुजराती, रस्सी अमरीकी
राजा ने पहना जो पट्टा, चुप रहिए

रूह मचलती है गर सच कह देने को,
होठों पर जड़ कर लीजै ताला, चुप रहिए

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