बह्र: 22 22 22 22 22 2
रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए
जंगल का कानून है पहला, चुप रहिए
मँहगाई से पागल जनता, चुप रहिए
पूँजीपति को सारी सुविधा, चुप रहिए
प्रश्न किया तो कह देंगे गद्दार सभी
अवतारी है अपना राजा, चुप रहिए
राजसभा में न्याय खड़ा है घुटनों पर
कर दीजै फूलों की वर्षा, चुप रहिए
सच को फाँसी पर लटकाया राजा ने,
झूठ न बोला जाय तो भैया, चुप रहिए
एलमुनियम गुजराती, रस्सी अमरीकी
राजा ने पहना जो पट्टा, चुप रहिए
रूह मचलती है गर सच कह देने को,
होठों पर जड़ कर लीजै ताला, चुप रहिए
यकीनन ग्रेविटॉन जैसा ही होता है प्रेम का कण। तभी तो ये मोड़ देता है दिक्काल को / कम कर देता है समय की गति / इसे कैद करके नहीं रख पातीं / स्थान और समय की विमाएँ। ये रिसता रहता है एक दुनिया से दूसरी दुनिया में / ले जाता है आकर्षण उन स्थानों तक / जहाँ कवि की कल्पना भी नहीं पहुँच पाती। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण अभी तक नहीं मिला / लेकिन ब्रह्मांड का कण कण इसे महसूस करता है।
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